Jazbaat-e-alfaaz

Namu Sharma

चलिए नज़्मों की गुफ्तगू करते हैं,कुछ हम सुनाते हैं,कुछ आप सुनाइएगा,चलिए फिर लाइए एहसासों का तराज़ू,एक भी लफ्ज़ अगर एहसास से मुतासिर न मिले,हल्का लगे तो बताइएगा। 🖋️

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